पूर्वोत्तर के इन 3 राज्यों को लेकर मोदी सरकार ने लिया अहम फैसला

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पूर्वोत्तर के इन 3 राज्यों को लेकर मोदी सरकार ने लिया अहम फैसला, दशकों बाद घटाया AFSPA का इलाका

 

Highlights

  • दशकों बाद पूर्वोत्‍तर में AFSPA के इलाको में हुआ बदला
  • असम, नगालैंड और मणिपुर में AFSPA का इलाका घटाया गया
  • अमित शाह ने पीए मोदी को दिया इसका श्रेय

नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने दशकों बाद पूर्वोत्तर के असम, नागालैंड, और मणिपुर राज्यों में आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट (AFSPA) के तहत आने वाले अशांत इलाकों को घटा दिया है। इस बात की जानकारी स्वयं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर दी। उन्होंने इस संबंध में सिलसिलेवार ट्वीट्स के जरिए इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसका श्रेय देते हुए लिखा, ये कदम पूर्वोत्तर में सुरक्षा की दृष्टि से बेहतर होती स्थिति और तेजी से विकास का नतीजा है। शाह ने नॉर्थ ईस्ट के लोगों को बधाई देते हुए कहा कि दशकों तक भारत का यह हिस्सा नजरअंदाज किया जाता रहा है, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार का फोकस इसी पर है।

केंद्रीय मंत्री सर्बानन्द सोनवाल ने फैसले का स्वागत किया

केंद्र सरकार द्वारा पूर्वोत्तर के राज्यों से आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट के आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट (AFSPA) के तहत आने वाले अशांत इलाकों में कम करने के फैसला का केंद्रीय मंत्री सर्बानन्द सोनवाल ने स्वागत किया है। उन्होंने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर के राज्यों में शांति, प्रगति और सुरक्षा के एक नए युग की शुरूआत हुई है। पूर्वोत्तर के राज्यों में आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट (AFSPA) की सीमा कम करने से यहां विकास और समृद्धि का एक नया वातारण तैयार करने में मदद होगी।

असम और मेघालय के बीच 50 साल पुराना सीमा विवाद सुलझा

पूर्वोत्तर के राज्यों को लेकर केंद्र की बीजेपी सरकार काफी सतर्क दिखाई दे रही है। एक दिन पहले ही गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में पूर्वोत्तर के दो राज्यों असम और मेघायल के बीच चल रहे 50 साल पुराने सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में एक अहम पहल की गई थी। बीते मंगलवार को ही असम के सीएम हेमंत बिस्वा सरमा और मेघालय के मुख्यमंत्री कोरनराड संगमा ने अमित शाह की मौजूदगी में दोनों राज्यों के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने कि दिशा में हुए समझौते पर दस्तख्त किए थे। दरअसल, दोनों राज्य 885 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। दोनों के बीच 12 जगहों को लेकर सीमा विवाद चल रहा था।