चंडीगढ़ पहुंची मिस यूनिवर्स हरनाज संधू: कहा-ताज के लिए नहीं खुद से जीतना था

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चंडीगढ़ में पहुंंची हरनाज कौर ने शहर का स्वागत इस तरह से किया।

दुनियाभर में भारत का नाम रोशन करने मिस यूनिवर्स हरनाज कौर संधू लगभग 6 महीने बाद चंडीगढ़ आई हैं। 22 वर्षीय इस मॉडल को देखने के लिए हर कोई बेक़रार था। इससे पहले एक एक ही दिन मिस दिवा के लिए शहर आई थी। चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए हरनाज कौर संधू ने कहा कि उनके परिवार और दोस्तों का उनकी सफलता में पूरा सहयोग रहा है। हर किसी के सहयोग से कोई आगे बढ़ता है।

पिछले साल उनके सिर पर मिस यूनिवर्स का ताज सजा था। इससे पहले वह मिस दिवा यूनिवर्स भी रह चुकी हैं। वह मूलरुप से गुरदासपुर की रहने वाली हैं। फिलहाल वह अपने परिवार के साथ खरड़ में रह रही हैं। हरनाज की मां राजिंदर कौर पेशे से डॉक्टर हैं। वह सोहाना अस्पताल में जॉब करती हैं।

गुरुनगरी में सब पसंद है हरनाज को

हरनाज ने बताया कि उन्हें अमृतसर की लस्सी, वहां के पापड़ काफी पसंद हैं। छोले-भटूरे वह खा नहीं सकती। वहीं स्वर्ण मंदिर के प्रसाद अच्छा लगता है। आगे कहा कि चंडीगढ़ में वह अपनी मां के हाथ का बना खाना ही खाना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में अब काफी कुछ खुल गया है। उन्होंने कहा कि मौका मिलता तो वह सेक्टर 17 और 35 की मार्किट घूमती। हरनाज ने बताया कि न्यूयार्क में भी उन्होंने मक्की की रोटी और दाल मक्खणी बनाना शुरु कर दिया है। वहीं कहा कि घर जैसा खाना कहीं भी नहीं मिलता।

मिस यूनिवर्स का ताज पाने के बाद यह खुशी थी हरनाज के चेहरे पर।

मिस यूनिवर्स का ताज पाने के बाद यह खुशी थी हरनाज के चेहरे पर।

मिस यूनिवर्स बन कर विजन क्लीयर हो गया है

हरनाज ने कहा कि मिस यूनिवर्स जैसा खिताब मिलने के बाद काफी आत्मविश्वास बढ़ता है। इसके साथ ही उनका विजन भी क्लीयर हो गया है। जिस चीज के लिए मेहनत कर रही थी वह जिंदगी में आनी शुरु हो गई। वहीं उन्होंने कहा कि मिस यूनिवर्स बनने के बाद उन्हें देश-विदेश में घूमने का भी काफी मौका मिल रहा है। इस दौरान उन्होंने वहां की संस्कृति और खान-पीन को लेकर भी काफी कुछ सीखा है। उन्होंने कहा कि वह अपनी जर्नी को शब्दों में बयां नहीं कर सकती।

मिमिक्री सीखी और काम आ गई

हरनाज ने कहा कि उन्हें एक्टिंग का शौक है और वह एक्टर भी बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि मिस दीवा की तैयारी के दौरान उनके मेंट्योर जो कम्यूनिकेशन के बारे में सिखाते थे, मुझे मिमिक्री करने को कहा था। ऐसे में स्टेज पर उनसे एक बार एक्टिंग के बारे में सवाल पूछा गया। वहां उन्होंने छोटा सा एक्ट का सबको हंसाया था।

हर किसी का अलग संघर्ष है, विजन एक ही होता है

हरनाज ने कहा कि हर इंसान की अपनी जिंदगी में अलग-अलग तरह का संघर्ष होता है। सबका सोचने का स्तर अलग होता है। हालांकि सबकी विजन यही होती है कि अपने लिए और समाज के लिए कुछ करें। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में वह मिस इंडिया थी तो स्टेज पर उनके एक सवाल किया गया था। वह उसका जवाब नहीं दे पाई थी। ऐसे में उन्होंने ठाना की अपना आत्मविश्वास बढ़ाना है और यह नहीं सोचना है कि वह कुछ नहीं कर सकती। ऐसे में खुद को साबित करने और व्यक्त करने के लिए हिम्मत बढ़ाई।

हरनाज रैंप पर मॉडलिंग के दौरान

हरनाज रैंप पर मॉडलिंग के दौरान

मिस यूनिवर्स के ताज के लिए नहीं खुद से जीतना था

हरनाज के मुताबिक वह मिस दीवा और मिस यूनिवर्स का खिताब जीतने के लिए नहीं आई थी। वह सिर्फ यह सोच कर आई थी उनका अपने आप से कॉम्पिटिशन है और अपने आप से जीतना हैं। साथ ही अपने आप को इस बात से हराना है कि पुरानी हरनाज बदल चुकी है। हरनाज से कहा कि लोगों को हिम्मत देने के लिए पहले खुद में हिम्मत लानी पड़ती है। यहीं उन्होंने अपने साथ किया।

मैं पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की स्टूडेंट हूं, सवालों से डर नहीं

सेलिब्रिटी अक्सर राजनीतिक सवालों से बचते हैं मगर हरनाज ने कहा कि वह पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की स्टूडेंट रही हैं। उन्होंने कहा कि उनकी प्रतियोगिताओं के दौरान भी राजनीति और समाज से जुड़े कई सवाल उनसे पूछे जाते थे। वहीं हरनाज ने कहा कि समाज में कई बार लड़कियों को टारगेट किया जाता है। ऐे में उन्हें अपनी आवाज उठानी सीखनी चाहिए। पुरुषवादी सोच वाले परिवारों और समाज में महिलाओं को अपने लिए खुल कर बोलने की ज़रुरत है।

जब से चंडीगढ़ पैर रखा भंगड़ा पा रही हूं

हरनाज ने कहा कि चंडीगढ़ आकर वह काफी खुश हैं। जब से उन्होंने यहां पैर रखा है तब से वह भंगड़ा पा रही हैं। उन्होंने कहा कि 6 महीने बाद वह चंडीगढ़ आई हैं। आखिरी बार वह एक ही दिन के लिए चंडीगढ़ आई थी। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय बाद परिवार को मिल कर काफी खुशी हुई है। परिवार ने हमेशा मुझे शेरनी बना कर रखा और सहयोग किया है। उन्होंने कहा कि जब सब उन्हें शेरनी बुलाते हैं तो बहुत अच्छा लगता है। उन्होंने कहा कि जिंदगी में कभी भी उन्होंने हार नहीं मानी।

30 दिन 3 घंटे की नींद ली मिस यूनिवर्स की तैयारी में

हरनाज के मुताबिक मिस यूनिवर्स बनने के लिए काफी प्रेशर था। तैयारियों के लिए सिर्फ 30 दिन ही थे। इस दौरान काफी शारीरिक और मानसिक दबाव रहा था। सुबह 3 बजे उठना पड़ता था और रात को 12 बजे सोती थी। ऐसे में 3 घंटे की ही नींद मिल पाती थी। पूरी टीम की यही रुटीन थी। मैं भारत का प्रतिनिधित्व कर रही थी और इसका नाम खराब नहीं होने देना चाहती थी। वहीं खाने-पीने की भी काफी तरह की पाबंदी थी।

हरनाज मूलरुप से गुरदासपुर की रहने वाली हैं।

हरनाज मूलरुप से गुरदासपुर की रहने वाली हैं।

कोई फर्क नहीं पड़ता ट्रोलिंग से; बॉडी पॉजीटिविटी की सोच है मेरे पास

हरनाज संधू ने कहा हमें कहा जाता है सोचो मगर हम पहले इंसान को देखते हैं फिर सोचते हैं। पहले बुली किया जाता था कि बहुत पतली है। फिर बुली किया जाता है कि मोटी है। उन्होंने साथ ही कहा कि कई चीजें शरीर पर प्रभाव डालती हैं। इनमें जगह, खान-पान भी शामिल है। उन्होंने कहा कि वह बॉडी पॉजीटिविटी में विश्वास करती हैं और मोटा या पतला होना उन्हें प्रभावित नहीं करता। उन्होंने कहा कि कई लोग उन्हें ट्रॉल कर रहे हैं मगर यह उनकी सोच है। उन्होंने कहा कि हर कोई खूबसूरत है। यह निर्भर करता है कि आपकी सोच क्या है और कैसे खुद को पेश करते हैं। आपके फीचर्स(बनावट) मायने नहीं रखता।

कंफर्ट जोन से बाहर आना ही पड़ता है

हरनाज ने एक सवाल के जवाब में कहा कि जिंदगी में कुछ पाने के लिए कंफर्ट जोन से बाहर तो आना ही पड़ता है। हरनाज ने कहा कि कई बार मिस यूनिवर्स को आम इंसान बन कर भी सोचना चाहिए। वह क्या सोचती है समाज के बारे में यह काफी ज़रुरी है। उन्होंने कहा कि वह मिस यूनिवर्स न होती तो आईएएस अफसर बनना चाहती थी।