(Massive fire in Amritsar Medical College)अमृतसर मेडिकल कॉलेज में भीषण आग: अस्पताल के ट्रांसफार्मरों में ब्लास्ट से वार्डों में भरा धुआं; 650 मरीजों को सुरक्षित निकाला

47
Quiz banner

Massive fire in Amritsar Medical College पंजाब में अमृतसर मेडिकल कॉलेज से जुड़े गुरु नानकदेव अस्पताल (GNDH) में शनिवार दोपहर अचानक आग लग गई। एक्स-रे यूनिट के पिछली ओर रखे दो ट्रांसफार्मरों में ब्लॉस्ट के बाद आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं। आग के कारण चारों तरफ धुआं ही धुआं फैल गया। इसके बाद अस्पताल के वार्डों में भर्ती 650 मरीजों को वार्डों से बाहर निकालकर सड़कों पर लाना पड़ा।

 

अस्पताल से बाहर निकाले गए मरीज।

घटना दोपहर 2:00 बजे के करीब गुरु नानक देव अस्पताल में हुई। शनिवार होने के कारण ओपीडी में मरीज नहीं थे, लेकिन अस्पताल में 650 के करीब मरीज भर्ती हैं। ओपीडी के पिछली ओर और एक्स-रे यूनिट के पास दो ट्रांसफार्मर लगे हैं। इनसे पूरे अस्पताल को बिजली सप्लाई हो रही है। दोपहर के समय इन ट्रांसफार्मरों में अचानक ब्लास्ट हुआ और आग लग गई। आग की लपटें काफी ऊपर तक गईं। ट्रांसफार्मरों के बिल्कुल ऊपर स्किन वार्ड है। धुंआ इतना ज्यादा था कि वार्ड के मरीजों को तुरंत बाहर निकालना पड़ा।

अस्पताल से बाहर निकाले गए मरीज।

अस्पताल से बाहर निकाले गए मरीज।

धुएं के कारण मरीजों को सड़कों पर लाया गया

आग ट्रांसफार्मरों पर लगने के कारण पूरे अस्पताल में धुआं फैल गया। मरीजों का धम घुटने लगा। इसके बाद सभी मरीजों को अस्पताल से बाहर सड़क पर लाया गया। एकदम मची भगदड़ के कारण कई मरीजों को खिड़कियां तोड़ बाहर निकाला गया।

अस्पताल से बाहर निकाले गए मरीज।

अस्पताल से बाहर निकाले गए मरीज।

एक घंटे से आग पर काबू पाने का प्रयास

घटना की जानकारी मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी मौके पर पहुंच गईं। पिछले एक घंटे से आग पर काबू पाने का प्रयास चल रहा है। ट्रांसफार्मरों में ऑयल के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है।

अस्पताल से बाहर निकाले गए मरीज।

अस्पताल से बाहर निकाले गए मरीज।

फायर सेफ्टी मापदंडों के कारण आग काबू में

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने बताया कि अस्पताल के फायर सेफ्टी सिस्टम के कारण ही आग पर काबू पाया गया। फायर सेफ्टी इंस्पेक्टर ने तुरंत ट्रांसफार्मरों की तरफ फायर बॉल्स फैंकी, इसके कारण आग कंट्रोल में हुई। फिलहाल मरीजों को बाहर निकाला गया है, लेकिन जैसे ही बिल्डिंग में धुआं कम होने लगेगा, मरीजों को दोबारा वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा।