इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की विभागीय जांच में बड़ा खुलासा: दयालु ट्रस्ट ने कर्मचारियों के खाने और अधिकारियों को मोबाइल गिफ्ट देने पर खर्चे 6 लाख

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प्रतीकात्मक फोटो

जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के दफ्तर पर पिछले दिनों विभागीय जांच टीम के छापे के बाद छह लाख का घोटाला सामने आया है। पता चला है ट्रस्ट के स्टाफ ने चुनाव के दौरान ड्यूटी देने वाले कर्मचारियों के खाने पर ही एक लाख रुपए खर्च कर डाले। ट्रस्ट के पैसे से एक आलाधिकारी और उनके लाड़ले को खुश करने के लिए महंगे मोबाइल खरीद कर दिए गए।

विभागीय जांच टीम जिस तरीके से रिकॉर्ड खंगाल रही है, उससे और भी कई घोटाले सामने आने की उम्मीद है। कांग्रेस और अकाली दल की सरकार के समय के दबे कई गढ़े मुर्दे बाहर निकल सकते हैं। गौरतलब है कि राज्य के लगभग सभी निगमों-बोर्डों के अध्यक्ष पदों पर काबिज सभी कांग्रेस नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है। जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्र्स्ट पर कांग्रेस की सरदारी अब भी बरकरार है। ट्रस्ट चेयरमैन के पद पर अब भी कांग्रेस नेता दलजीत सिंह आहलूवालिया काबिज हैं। अभी तक उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र नहीं दिया है।

ईओ ने कहा तो बनाए क्लर्क के नाम पर चेक

विभागीय जांच में निकले पहले घोटाले के बाद अब हर कोई अपनी जान बचाने में लगा है। एक-दूसरे पर दोषारोपण किए जा रहे हैं कि उन्होंने जो भी किया वह अधिकारियों के दबाब में किया। इम्प्रूवमेंट ट्र्स्ट के लेखाकार अशीष ने बताया कि पहले एक लाख रुपये का एडवांस का चैक ट्रस्ट के एक क्लर्क के नाम पर बनाया गया। यह चेक चुनाव से पहले बनाया गया था।

इस पैसे का सदुपयोग ड्यूटी दे रहे कर्मचारियों के खाने पर किया गया। इसके क्लर्क महोदय ने बिल भी जमा करवा दिए हैं। इसके बाद अपनी डीडीए लिमिट से आगे निकलते हुए पांच लाख का चेक बनाया गया। अब लेखाकार से पूछा गया कि आपने दो लाख की सीमा का क्रास करते हुए पांच लाख का चेक क्लर्क के नाम पर कैसे बना दिया, उनका जवाब था कि अधिकारियों ने उन पर दबाब बनाया था। उन्होंने कहा कि सारे चेकों पर ईओ के हस्ताक्षर होते हैं उसी के बाद वो पास होता है। हैरानी की बात तो यह है कि अकाउंटेंट ने बिना किसी ऑब्जेक्शन के दोनों चेक बनाए और ईओ ने भी उन्हें पास दिया। लेखाकार ने यह भी बताया कि पांच लाख के बिल अभी तक उसके पास नहीं आए हैं। यदि बिलों में कोई ऑब्जेक्शन हुआ तो क्लर्क के खाते से उसकी वसूली की जाएगी।

इसी बीच ईओ परमिंदर सिंह गिल ने कहा कि यदि किसी तरीके का गबन निकला तो लेखाकार और क्लर्क से इसकी वसूली की जाएगी। इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भी की जाएगी।

चेयरमैन पहले बोले- उनका कोई लेना देना नहीं, बाद में कहा- सब झूठ

इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन दलजीत सिंह आहलूवालिया ने कहा कि उनके दफ्तर में विजिलेंस का कोई छापा नहीं पड़ा था। जब उनसे पूछा गया कि विभागीय टीम ने जांच की है तो बोले कि हां विभागीय जांच जरूर हुई थी। उन्होंने ट्रस्ट में सामने आए छह लाख के घोटाले से पहले तो अपना पल्ला साफ ही झाड़ लिया और बोले कि उनका ट्रस्ट के खर्च से कोई लेना देना नहीं है, सीईओ बताएंगे। जब कहा कि आप चेयरमैन हैं तो जांच की आंच तो आप तक भी आएगी, तो बोले कि ट्रस्ट में कोई घोटाला नहीं हुआ है। सब झूठ है। सारी बातें सुनी सुनाई हैं। ट्रस्ट का कोई पैसा इधर उधर खर्च नहीं हुआ है। उन्होंने यहां तक कह डाला कि मीडिया सारी बातें अपनी मर्जी से लिख रहा है।