आरटीआई में खुली पुलिस की पोल: चंडीगढ़ की स्मार्ट पुलिस सैंकड़ों एफआईआर और शिकायतें साल भर से नहीं सुलझा पाई

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चंडीगढ़ के थानों में शिकायतों और एफआईआर का अंबार लगा हुआ है। एक साल से भी ज्यादा समय से यह लंबित हैं।

चंडीगढ़ की स्मार्ट पुलिस असल में आपराधिक मामलों को कितनी संजीदा है उसका खुलासा एक आरटीआई की रिपोर्ट से हुआ है। इसके मुताबिक एक साल से ज्यादा समय से 771 एफआईआर और 902 शिकायतों में जांच अभी तक लंबित है। वहीं सेक्टर 26 थाने में पिछले एक साल से कोई भी एफआईआर और शिकायत जांच के लिए लंबित नहीं है। इनमें सबसे ज्यादा लंबित एफआईआर (174) सेक्टर 17 के वूमेन पुलिस स्टेशन में हैं। यहां पर ज्यादातर घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना जैसे मामले देखे जाते हैं। इसके बाद मलोया में 114 एफआईआर लंबित हैं।

902 लंबित शिकायतों में सबसे ज्यादा 250 सेक्टर 3 के थाने में हैं। यह चंडीगढ़ का पहला आईएसओ-सर्टिफाइड पुलिस थाना है। इंस्पेक्टर शेर सिंह इस थाने के इंचार्ज हैं। सेक्टर 36 के पुलिस थाने में 86 एफआईआर लंबित हैं। इसी तरह सेक्टर 39 थाने में 84 एफआईआर लंबित हैं। सेक्टर 3 थाने में 64 एफआईआर लंबित हैं। सेक्टर 31 थाने में 43 एफआईआर लंबित हैं। चंडीगढ़ में वूमेन पुलिस स्टेशन को मिला कर कुल 17 पुलिस थाने हैं। इन्हें पांच सब-डिवीज़नल पुलिस ऑफिसर देखते हैं। इनमें 2 आईपीएस अफसर भी हैं।

वहीं आरटीआई के मुताबिक थानों में जांचकर्ता पुलिस अफसरों की स्थिति भी चिंताजनक है। मलोया थाने में 9 जांचकर्ता पुलिसकर्मी हैं। यहां 114 केस साल भर से ज्यादा समय से लंबित हैं। लंबित जांच के चलते अपराधियों को जमानत आदि में अदालतों से राहत मिल जाती है।

तय समय में जांच पूरी करनी होती है

सीआरपीसी की धारा 468 अपराध की प्रवृत्ति के हिसाब से एक तय समय में जांच पूरी करने के लिए जांच एजेंसी को बाध्य रखती है। गंभीर अपराधों में थोड़ा समय लिया जा सकता है मगर जहां सजा 6 महीने तक हो उन केसों में जल्द जांच पूरी करनी होती है। कई थानों में सट्‌टे के मामले भी डेढ़ साल से लंबित पड़े हुए हैं।

पुलिस गंभीरता से ले रही है लंबित मामलों को

चंडीगढ़ पुलिस के अफसर कहते हैं कि लंबित मामलों को लेकर स्थिति उनकी जानकारी में है। इसे वह काफी गंभीरता से ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि चोरी जैसे केसों (वाहन चोरी आदि) में जांच एक महीने में पूरी करने पर फैसला लिया है। यदि आरोपी एक महीने में नहीं पकड़ा जाता तो पुलिस अनट्रेस रिपोर्ट बना कोर्ट में पेश कर रही है। वहीं कई थानों में लंबित केस काफी कम हुए हैं।

दहेज प्रताड़ना, शोषण और घरेलू हिंसा जैसे मामलों में पुलिस को काफी पहलुओं पर गौर करना पड़ता है। घरेलू हिंसा के मामलों में दिशानिर्देश बने हुए हैं। इसके चलते लंबी काउंसिलिंग करनी पड़ती है।